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विश्व होम्योपैथी दिवस पर इंदौर में सकारात्मक ऊर्जा से भरा आयोजन, ‘सेहत एवं सूरत’ विशेषांक का विमोचन
इंदौर। विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर ए.बी. रोड स्थित एक निजी होटल में होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (HMAI), इंदौर शाखा द्वारा एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर ‘सेहत एवं सूरत’ मासिक स्वास्थ्य पत्रिका के होम्योपैथी विशेषांक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जागरूकता, शोध और समन्वित चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देने का सशक्त संदेश दिया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. वैभव चतुर्वेदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कोविड काल में आर्सेनिक एल्बम के उपयोग से उनका होम्योपैथी के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ।
👉 “होम्योपैथी और एलोपैथी के समन्वय से बेहतर और तेज परिणाम संभव हैं।”
डॉ. एस. पी. सिंह ने बताया कि आज कैंसर जैसी जटिल बीमारियों में होम्योपैथी सहायक चिकित्सा के रूप में प्रभावी भूमिका निभा रही है और इंदौर तेजी से रिसर्च हब के रूप में उभर रहा है।
डॉ. वैशाली वायकर ने होम्योपैथी को संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार बताते हुए युवाओं को पुस्तकों और ज्ञान से जुड़ने का संदेश दिया।
डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन ने अपने क्लिनिकल अनुभव साझा करते हुए कहा कि कई स्पाइन रोगों में सर्जरी से बचते हुए होम्योपैथी और जीवनशैली सुधार से अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
डॉ. ए. के. द्विवेदी ने होम्योपैथी के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 2014 के बाद आयुष के प्रोत्साहन से इस चिकित्सा पद्धति को नई दिशा मिली है।
👉 “वैज्ञानिक प्रमाण और शोध के साथ होम्योपैथी को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना हमारा लक्ष्य है।”
उन्होंने आगे कहा कि कैंसर एवं क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के दौरान होने वाली एनीमिया में भी होम्योपैथिक उपचार सहायक सिद्ध हो सकता है। साथ ही घर में उपलब्ध भारतीय खाद्य पदार्थों के माध्यम से प्राकृतिक रूप से रक्त बढ़ाने पर जोर दिया।
👉 “जीवन में कभी हार न मानें—संभव है अगला प्रयास ही आपको सफलता दिला दे।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ द्विवेदी ने कहा कि इंदौर अब एडवांस्ड और मॉडर्न होम्योपैथी का उभरता हुआ केंद्र बन चुका है।
कार्यक्रम का संचालन दीपाली पांचाल, स्वागत विनय पांडेय एवं आभार दीपक उपाध्याय ने व्यक्त किया। इस अवसर पर जूनियर चिकित्सकों एवं स्काउट-गाइड सदस्यों को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया।
अंत में सभी ने डॉ. सैम्युल हैनीमेन को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
✨ यह आयोजन सकारात्मक सोच, जन-जागरूकता, अनुसंधान और समन्वित चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम साबित हुआ।


